मुरझाई बगियाँ जीवन की, खुशबू से महकाएगी।।

0
59

संकट की मँडराई बदलीं, अब जल्दी छट जाएगी ।
मुरझाई बगियाँ जीवन की, खुशबू से महकाएगी।।

आये कितने आंधी तूफ़ा, हिमगिरि क्या थर्याया है ।
चट्टानी गुम्बद सागर की, धारा मोड़ न पाया है ।
नव उमंग और उत्साह से, हमे सामना करना है ।
मिट जाए ये व्याधि भयंकर, रब से कामना करना है ।
संयम संकल्पित परिपाटी, हमको जीत दिलायेगी।
संकट की मँडराई बदलीं, अब जल्दी छट जाएगी ।
मायूस हुए जनजीवन में, मुस्कान लोट फिर आएगी।।

नहीं हौसला खोना हमको, डटकर इससे लड़ना है ।
सेनेटाइज करे हाथ तो, भीड़ -भाड़ से बचना है।
रखे फोन में आरोग्य सेतु ,दो गज दुरी हो पालन ।
बने गरीबों के मसीहा, सेवा में लगाके तन मन धन ।
मास्क बनाले आदत अपनी, जीवन जोत जलायेगी ।
संकट की मँडराई बदली, अब जल्दी छट जाएगी ।
मायूस हुए जनजीवन में, मुस्कान लोट फिर आएगी ।।

विजय तरंगे गूंजेंगे फिर, माँ वीणा की स्वर लय में ।
जोत जलेगी शिक्षा की हर, कॉलेज और विद्यालय में ।
फिर खुशियों के दीप जलेंगे, भारत माँ के आंगन में ।
जश्न मनेगा त्योहारों पर, हिंदुस्तानी प्रांगण में ।।
देवधरा के हर कण कण में, फिर खुशहाली छायेगी ।।
संकट की मँडराई बदली, अब जल्दी छट जाएगी ।
मायूस हुए जनजीवन में, मुस्कान लोट फिर आएगी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here